भारत भूमि (सम्पादक – प्रदीप टिक्यानी) : अजमेर में स्ट्रीट वेंडर्स को बड़ी राहत मिली है। सिविल न्यायाधीश कोमल भाटी ने नगर निगम अजमेर द्वारा दायर की गई चार अर्जियों को एक साथ खारिज कर दिया है। इन अर्जियों में नगर निगम ने अदालत के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई थी। पूर्व लोकअभियोजक विवेक पाराशर ने बताया कि अदालत ने स्ट्रीट वेंडर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 8 अक्टूबर तक के लिए स्थगन आदेश (stay order) बढ़ा दिया है। निगम ने दावा किया था कि अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्हें दावा पेश करने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया था, और स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत यह मामला सुनवाई योग्य नहीं था। अदालत ने स्ट्रीट वेंडर्स के वकीलों – विवेक पाराशर, संजीव रोहेला, और जितेश धनवानी के तर्कों से सहमति जताई। अदालत ने माना कि यह मामला सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसलिए निगम की सभी अर्जियों को खारिज कर दिया गया। यह मामला तब शुरू हुआ जब जून 2025 में आनासागर चौपाटी और रीजनल कॉलेज के पास व्यापार करने वाले वेंडर्स को नगर निगम द्वारा जबरन हटाकर मित्तल हॉस्पिटल के सामने शिफ्ट करने की धमकी दी गई थी। वेंडर्स ने इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था और तब से उन्हें अदालत से राहत मिलती आ रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
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