मंत्र जाप और दृढ़ विश्वास से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव – संत उत्तमराम शास्त्री, शिव विवाह उत्सव में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब
भारत भूमि (सम्पादक – प्रदीप टिक्यानी) अजमेर : घूघरा स्थित ग्रीन कॉलोनी में आयोजित शिव महापुराण कथा एवं शिव विवाह महोत्सव के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आस्था का भव्य संगम देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध भागवत भूषण कथा वाचक एवं रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत उत्तमराम शास्त्री ने कहा कि मंत्र जाप और दृढ़ विश्वास से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है, क्योंकि मनुष्य के जीवन में जैसे ही अभिमान आता है वैसे ही भक्ति नष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान भक्ति, प्रेम और श्रद्धा के भूखे हैं, न कि दिखावे के, इसलिए पूजा-अर्चना, माला जाप, दान-पुण्य या किसी की सहायता करने के बाद उसका प्रचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अहंकार से की गई साधना निष्फल हो जाती है। संत उत्तमराम शास्त्री ने भगवान नारद, भोलेनाथ और श्रीहरि की कथाओं का वर्णन करते हुए बताया कि नारद जी को भी अपनी भक्ति पर अभिमान हुआ था, जिसका फल उन्हें भोगना पड़ा। उन्होंने राम कथा और नवधा भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक मन में सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास नहीं होता, तब तक कोई भी साधना सार्थक नहीं होती तथा गुरु द्वारा दिया गया मंत्र जाप जीवन को नई शक्ति प्रदान करता है और साधक को ईश्वर के समीप ले जाता है। कथा के दौरान शिव कथा और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के महत्व को भावपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया गया। इस अवसर पर भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई तथा शिव-पार्वती विवाह का मनोहारी आयोजन हुआ, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। भजन गायकों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान प्रेम सिंह चौहान एवं सीमा कंवर ने पंडित राकेश शास्त्री के सानिध्य में द्वादश ज्योतिर्लिंग की पूजा-अर्चना एवं रुद्राक्ष पूजन किया, वहीं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 11,000 रुद्राक्षों की विधिवत पूजा एवं अभिषेक भी संपन्न कराया गया। यजमान पुखराज जी द्वारा पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। समापन अवसर पर संत उत्तमराम शास्त्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान राम को अपने जीवन में उतारें और राम जैसा आदर्श जीवन जिएं, जिस प्रकार भगवान राम ने पिता की आज्ञा से राज्य का त्याग किया और भरत ने भी भगवान की चरण पादुकाओं के माध्यम से राज्य का संचालन कर आदर्श स्थापित किया, वही मार्ग आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणास्रोत है।
