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शीतला सप्तमी पर श्रद्धा और आस्था के साथ हुई पूजा-अर्चना

 


श्रद्धालुओं ने शीतला माता को लगाया ठंडे पकवानों का भोग –

नसीराबाद ( योगेन्द्र बुलचन्दानी ) नगर के नागरिक ग्रामीण और सैन्य क्षेत्रों में बुधवार को शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया इस अवसर पर श्रद्धालु महिलाओं ने एक दिन पहले बनाए गए पुए और पकवानों का भोग लगाया और शीतला माता से अपने परिवार के सदस्यों के लिए सुख समृद्धि और निरोगी तथा दीर्घायु होने की कामना की और दिन की शुरुआत ठंडे पकवानों से करते हुए पूरे दिन ठंडा भोजन कर परम्परागत ढंग से शील सप्तमी का त्यौहार मनाया बुधवार सुबह से ही नगर के श्रद्धालु गण बड़ी संख्या में शीतला माता मंदिरों में पूजा करने पहुंचे और विधि-विधान से माता शीतला की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों की अच्छी सेहत की कामना करते हुए माता शीतला को बासी पकवानों, पूरी, पकौड़ी, हलवादही बड़े आदि ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया। सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बनाए गए भोजन का ही प्रसाद स्वरूप सेवन किया जाता है। सुबह से ही दूधिया मोहल्ले, कहार मोहल्ले गांधी चौक सुत्तर खाना मोहल्ले सहित अन्य मोहल्लों में और आसपास के गांवों देराठू, लोहरवाड़ा दिलवाड़ा रामसर बाघसुरी नांदला भवानीखेड़ा बुबानिया हाउसिंग बोर्ड कालोनी के साथ ही सैन्य क्षेत्र में रहने वाले सैन्य परिवारों द्वारा भी विधि विधान से शील सप्तमी पर्व मनाया गया और मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह में भजन-और माता के गीत गा कर माता शीतला की महिमा का गुणगान किया।

शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट की गई और भक्तों ने माता के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने माता से परिवार की खुशहाली, रोगों से मुक्ति और सुख-शांति की प्रार्थना की। शीतला सप्तमी का पर्व विशेष रूप से माता शीतला की आराधना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शीतला माता की पूजा करने से पूरे साल बीमारियों से रक्षा होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उत्तर भारत में यह पर्व होली के बाद सप्तमी के दिन अत्यन्त श्रद्धा पूर्वक तथा धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाता है इस अवसर पर नगर की ज्यादातर चाय और खाद्य पदार्थों की दुकानें बंद रहीं जिसके चलते बाजार में चहल पहल भी कम दिखाई दी और व्यापार भी कुछ हद तक प्रभावित रहा और सरकारी कार्यालयों में अनेक कार्मिक गैर हाजिर रहे वहीं रोडवेज बसें भी जयपुर -भीलवाड़ा रूट पर कम चलने से मुसाफिरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा

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