भारत भूमि (सम्पादक – प्रदीप टिक्यानी) श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ और जन सेवा समिति की सर्वधर्म समिति के संयुक्त तत्वावधान में आज बारावफात के अवसर पर गंज गुरुद्वारे के सामने स्थित होटल रीगल में एक वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने कौमी एकता, आपसी स्नेह और मानव स्वभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, हाजी सदरुद्दीन कुरैशी ने कहा, “एक व्यापारी का धर्म और मज़हब दोनों ही व्यापार होता है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हम सभी को बिना किसी जाति या लिंग के भेदभाव के सबका सम्मान करना चाहिए और एक ही ईश्वर की संतान मानना चाहिए।
इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक और श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ के महासचिव रमेश लालवानी ने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को 84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ बनाया है और हमें इस जीवन का लाभ उठाते हुए सबको एक ही पिता की संतान मानना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष मानमल गोयल ने की।
गोष्ठी में जैन समुदाय की श्रीमती खुशाल जैन ने भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर चलने का संदेश दिया। सिख समुदाय से सरदार जगजीत सिंह छाबड़ा और सरदार भजन सिंह ने बताया कि गुरु नानक का संदेश किसी विशेष समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए है। मुस्लिम समुदाय की श्रीमती शहनाज खान ने बारावफात के पर्व को भी कौमी एकता के रूप में मनाने के लिए धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर, विभिन्न बाज़ारों से आए अनेक प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें महासंघ के अध्यक्ष महेंद्र बंसल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र मूरजानी, किशन पारीक, किशोर टेकवानी, और अन्य सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव रमेश लालवानी ने किया, जबकि आभार अध्यक्ष महेंद्र बंसल ने व्यक्त किया। यह गोष्ठी समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास थी।
