Logo
ब्रेकिंग
पार्किंग स्थल पर वाहन खड़ा नहीं करने वालों के खिलाफ छावनी परिषद और यातायात पुलिस की संयुक्त कार्यवाह... छावनी परिषद प्रशासन ने शुरू किया नो पार्किंग एरिए में अवैध रूप से खड़े वाहनों के विरुद्ध मुहिम पर्यटन नगरी के रूप में उभर रहा अजमेर हर क्षेत्र में हुआ विकास-देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष ने शनिवार को... विख्यात राजगढ़ भैरव धाम अजमेर के मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज का 61वाँ जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान में 21जून को मनाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस आचार्य सतगुरु टेऊँराम जी का 84वाँ वर्सी उत्सव श्रद्धा पूर्वक मनाया गया छावनी परिषद के सी ई ओ मोहम्मद साकिब आलम ने लिया विकास कार्यों का जायज़ा अजमेर उत्तर की सातों डिस्पेंसरियों में अब एक्स-रे सुविधा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दी सौग... विजय नगर में आयोजित होने वाले विप्र महा कुंभ को लेकर नसीराबाद क्षेत्र के ब्राह्मणों की बड़ी सभा आयोज... नसीराबाद में दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व राजेश पायलट की 26 वी पुण्य तिथि, प्रेरणा दिवस, के रूप में मना...

महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर में स्थापना दिवस का आयोजन, ऋषि दयानन्द ने किया था भारतीय ज्ञान परंपरा का बीजारोपण – हनुमान सिंह राठौड़, देवनानी एवं सुरेश सिंह रावत ने दिया उद्बोधन

भारत भूमि (अजमेर)— विश्वविद्यालय का नामकरण जिन महापुरूष के नाम पर किया गया है वे महर्षि दयानंद सरस्वती महान पुरुष, शिक्षाविद, समाज सुधारक थे जिनके दर्शन का सम्मान न केवल भारत में बल्कि विश्व में भी किया जाता है। उन्होंने कुरीतियों, जातिवाद, अंधविश्वास, ऊंच-नीच, छुआछूत जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए। स्वामी दयानन्द सरस्वती वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के प्रणेता रहे। स्वामी दयानंद सरस्वती ने अंग्रेजी औपनिवेशिक शिक्षा के विकल्प के रूप में भारतीय ज्ञान प्रणाली को स्थापित करने का बीज बोया। डीएवी आंदोलन (दयानंद एंग्लो-वैदिक) यह एक मध्यम मार्ग था, जहाँ अंग्रेजी माध्यम के बावजूद भारतीय संस्कृति की शिक्षा प्रदान की जा सकती थी। एंग्लो तो है लेकिन वैदिक है। अंग्रेजी माध्यम में भी हम अपनी भारतीय संस्कृति को पढ़ा सकते हैं। उक्त विचार शिक्षाविद् हनुमान सिंह राठौड़ ने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वर्णित भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनः स्थापित करने के बीज सर्वप्रथम स्वामी दयानंद सरस्वती ने ही बोए थे। विद्या प्राप्त करना तप है। भारतीय परंपरा में मेधा बुद्धि केवल बुद्धिमान होने तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त संसार के हित की कामना करने के लिए तप करना सनातन संस्कृति है। मनोचिकित्सकों ने आज सिद्ध किया है कि बच्चे को शिक्षा उसी भाषा में मिलनी चाहिए जिसमें वह स्वप्न देखता है उन्होंने वर्तमान में अंग्रेजी को कैरियर और बड़े पैकेज से जोड़ने की मानसिकता पर चिंता व्यक्त की, जिससे मातृभाषा का महत्व कम होता जा रहा है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए जलसंसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि वे विश्वविद्यालय के विकास के लिए योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज विश्वविद्यालय के समक्ष अतिक्रमण, स्टाफ व शिक्षकों की कमी सहित कई चुनौतियाँ है, इनका समाधान करने के लिए सरकार के स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वे इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और इसे श्रेष्ठता के स्तर पर आगे बढ़ाना उनका सौभाग्य होगा। इस अवसर पर संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रो देवनानी ने कहा कि सबसे बड़ी आवश्यकता सनातन संस्कृति को मजबूत करने की है। सनातन संस्कृति रहेगी तो ही हम रहेंगे। संस्कृति से ही जीवन जीने जीने की शैली, हमारा विचार, हमारा सोच, हमारा लक्ष्य, हमारा उद्देश्य परिभाषित होता है। उन्होंने विश्वविद्यालय स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कुलगुरू को शिक्षकों एवं स्टाफ की कमी को लेकर सकारात्मक कार्यवाही करने के लिए विश्वास दिलाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो0 सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि स्थापना दिवस आत्मवलोकन का दिवस होता है कि हमने 38 वर्षों में क्या किया, क्या शेष रह गया और क्या करना बाकी है और उसका लेखा-जोखा तैयार करके आगे की यात्रा का निरूपण करना होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हमें यह तय करना है कि हमारा विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान किस तरह से बने। कुलगुरु ने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी का संचरण नहीं होनी चाहिए, बल्कि बोध पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंन कहा कि शिक्षकों को छात्रों को न केवल जवाब देना सिखाना चाहिए, बल्कि प्रश्न करने की कला भी सिखानी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप, वे अन-लर्न करने की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कुलगुरू ने कहा कि पुरानी, अनुत्पादक धारणाओं और विचारों को छोड़कर ही भारत को विश्व गुरु बनया जा सकता है। विश्वविद्यालय का प्रमुख लक्ष्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, हर पाठ्यक्रम में पहली इकाई भारतीय ज्ञान परंपरा की होगी, और अनुसंधान में भी सैद्धांतिक ढांचे में भारतीय परंपरा को शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व कुलपति प्रो0 बी आर छीपा ने भी उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती को मनीषी तथा भारतीय संस्कृति के पुरोधा के रूप में जाना जाता हैं । अतः स्वाभाविक है कि उनका साहित्य, संस्कार और शिक्षा हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।

महर्षि दयानन्द ने भारतीय ज्ञान परम्परा को यज्ञ की पद्धति के माध्यम से प्रचारित किया अतः विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ वैदिक यज्ञ के साथ हुआ जिसे माननीय विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी ने सराहा इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में कल्पवृक्ष के जोड़े का रोपण भी अतिथियों द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रिया भार्गव ने दिया तथा संचालन प्रो0 अरविंद पारीक ने किया। इस अवसर पर पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश शेखावत एवं प्रो. के सी शर्मा, प्रबंध बोर्ड सदस्य प्रो. अनिल दाधीच एवं प्रो. ऋतु माथुर, अधिष्ठाता शिक्षा संकाय प्रो. सुचेता प्रकाश तथा विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. सुभाष चन्द्र, प्रो. सुब्रतो दत्ता, प्रो. शिव प्रसाद, यूजीसी दयानन्द चेयर प्रो. नरेश कुमार धीमान, दयानन्द महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. लक्ष्मीकांत शर्मा, डा. आशीष पारीक, प्रो. शिवदयाल सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ सुनील कुमार टेलर, वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा, डॉ सूरज मल राव, डॉ तपेश्वर, प्रो. आशीष भटनागर, प्रो. प्रवीण माथुर, डॉ मदन मीणा, डॉ ए. जयंती सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अजमेर नगर से पधारे गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा।