पद्मश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम के साहित्यिक योगदान को सम्मानित करते हुए अजयमेरु प्रेस क्लब में डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा के ग़ज़ल संग्रहों का भव्य विमोचन समारोह
भारत भूमि (सम्पादक – प्रदीप टिक्यानी) अजमेर : अजयमेरु प्रेस क्लब के सभागार में साहित्य और कला का अनुपम संगम देखने को मिला, जब मशहूर शायर पद्मश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम ने एमडीएस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा के दो ग़ज़ल संग्रहों “बर्ग-ओ-गुल” और “ज़हर आब-ए-हयात है” का लोकार्पण किया। इस अवसर पर शीन क़ाफ़ निज़ाम को क्लब की मानद सदस्यता भी प्रदान की गई। मुख्य अतिथि शीन क़ाफ़ निज़ाम ने बताया कि शब्द एक पनाहगाह है, जहाँ सन्नाटा सो रहा होता है। उन्होंने ग़ज़ल और शायरी को जानने की प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि शायर वही अनुभव करता और व्यक्त करता है जो उसने जीवन में देखा और भोगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाव की अभिव्यक्ति “ये” नहीं, बल्कि “यूँ” होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री डॉ चंद्र प्रकाश देवल ने कहा कि शायरी समाज तक भाव पहुंचाने का माध्यम है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश अग्रवाल ने ग़ज़ल की तकनीक से अधिक भाव और खयाल की अहमियत पर जोर दिया। डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा ने अपनी प्रेरणा और संघर्ष की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि लेखन का समय उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मिला। पुस्तक शीर्षक “बर्ग-ओ-गुल” पर प्रकाश डालते हुए मंच संचालन अमित टंडन ने बताया कि लेखक ने रदीफ़-काफिया में अंग्रेजी शब्दों का भी प्रयोग कर नए प्रयोग किए हैं। पुस्तक “ज़हर आब-ए-हयात है” की सारगर्भित समीक्षा शिक्षाविद डॉ शमा खान ने प्रस्तुत की। अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प अर्पण किया। पायल गुप्ता द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। इसके बाद सभी अतिथियों ने डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा के ग़ज़ल संग्रहों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर क्लब अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल व महासचिव अरविंद मोहन शर्मा ने शीन क़ाफ़ निज़ाम को मानद सदस्यता प्रदान की। क्लब परिवार में उनका स्वागत शॉल ओढ़ाकर व प्रतीक-शील्ड देकर किया गया। पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह सनकत ने आभार ज्ञापन करते हुए क्लब के एथिक्स-वैल्यू की जानकारी दी। कार्यक्रम में सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं कला प्रेमी उपस्थित थे। सभी ने साहित्य के इस अमूल्य योगदान को सराहा और कार्यक्रम का सफल संचालन फरहाद सागर द्वारा किया गया।
